Wednesday, 11 March 2015

ख्वाब

एक ख्वाब देखा था
कल रात को मैंने
तुम आयीं थीं
मुझसे मिलने को ।

अपनी लाल बाहें फ़ैलाकर
सूरज
समेत रहा है सारा आकाश

ताकि रात के अंधेरे  में
चाँद
मुस्कुरा सके तुम पर

और चुपचाप झाँक सकें
तारे
आँख मिचोली कर फ़िर, छुप  जाएं

जब तुम
और जब तुम छत पर आओ,
चांदनी का नक़ाब  ओढ़े

मुझसे
हाँ ! मुझसे मिलने को ।

तुम  आयीं थीं
मुझसे मिलने को ।
कल रात को मैंने
एक ख्वाब देखा था ।

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