Tuesday, 18 February 2014

|| मेरे संग चलने वाले ||

मुझको वीराना दे गए बेढंग चलने वाले
मेरा साथ देने आये थे मेरे संग चलने वाले ॥

आहिस्ता पिघला किया मेरे उसूलों का पहाड़
और मुझपे हंस रहे हैं उसपे चढ़ने  वाले ।
मेरा साथ देने आये थे मेरे संग चलने वाले ॥

अपनी अदायें  भी कभी कातिलाना थीं रफ़ीक
आज मुझको मारते हैं मुझपे मरने वाले ।
मेरा साथ देने आये थे मेरे संग चलने वाले ॥

हूँ आवारगी के नशे में बेख़ुद मैं ज़रूर
हैं आईने से बेखबर मुझे ताज़ीर करने वाले ।
मेरा साथ देने आये थे मेरे संग चलने वाले ॥

मेरी कबर पे आइयेगा मुस्कुराकर ऐ हुज़ूर
मुझको 'राही'  नापसंद आंसू बहाने वाले ।
मेरा साथ देने आये थे मेरे संग चलने वाले ॥

-राही