Thursday, 28 November 2013

बेवजह

उनकी आँखों में  नज़र आया मुझे मेरा नसीब
गिरते अश्कों में पाया है तसव्वुर अपना ॥

ये ग़लत है  कि वफ़ा इश्क़ का पैमाना है
मेरी आदत थी ऐतबार की, उनकी वादे करना ।
गिरते अश्कों में पाया है तसव्वुर अपना ॥

 क्या ज़रूरी है  हर मुलाक़ात का कोई अंजाम ही हो
अच्छा लगता है उनसे यूँ बेवजह मिलना जुलना ।
गिरते अश्कों में पाया है तसव्वुर अपना ॥

नहासिल ही मोहब्बत का हासिल 'राही'
ये समझलो तो फ़िर आसां है मोहब्बत करना ।
गिरते अश्कों में पाया है तसव्वुर अपना ॥

उनकी आँखों में  नज़र आया मुझे मेरा नसीब
गिरते अश्कों में पाया है तसव्वुर अपना ॥

-- राही