Tuesday, 8 October 2013

शोर

सुनो
कितना शोर
सब ओर सब ओर
 
मैं, तुम, हम
मेरा, तुम्हारा, हमारा
फ़िर  मैं. तुम. हम
फ़िर से मेरा, तुम्हारा, हमारा
 
अहंकार ।

सुनो
कितना शोर
सब ओर सब ओर
 
कुछ नहीं , कुछ , सब कुछ
और , थोड़ा  और,  अब बस
दोबारा कुछ नहीं, कुछ, सब कुछ
नोचो और, थोड़ा  और, और फिर बस
 
मोह ।

सुनो
कितना शोर
सब ओर सब ओर
 
असीमित रूह की देह
या सीमित देह की आत्मा
जनम मृत्यु बिछुड़ाव 
लगातार  जनम मृत्यु बिछुड़ाव

चक्र । 

सुनो
कितना शोर
सब ओर सब ओर
 
रूदन मनन चिंतन
सत्य असत्य मोक्ष
और रूदन मनन चिंतन
खोज सत्य असत्य मोक्ष
 
शून्य ।


सुनो
कितना शोर
सब ओर सब ओर
-- राही