Wednesday, 24 April 2013

|| फिर से प्यार हमें हो जायेगा ||



 
ज़िन्दगी के कामों में
महंगे महंगे बाजारों में
राशन की कतारों में
तुम मुझको भूल न जाना
तुम मेरा साथ निभाना । 
मुशिकलें बहुत सारी हों
रोज़गार की मारामारी हो
चाहे जैसी दुनियादारी हो
तुम मुझको भूल न जाना
तुम मेरा साथ निभाना ।
रुकना न चाहे कुछ हो
थकना न चाहे कुछ हो
बदलाव चाहे कुछ हो
तुम मुझको भूल न जाना
तुम मेरा साथ निभाना ।
ये दुनिया चलती जाएगी
उमर भी ढलती जाएगी
उन साथ बिताये लम्हों की
पूरे हो चुके सपनों की
और तेरी मेरी सांसों की
वो बातें जो हम करते थे
याद तुम्हे जब आएँगी
आँखें नम हो जाएँगी  ।
लब पे होंगे न शब्द कोई
ये मेरी लिखी कवितायेँ भी
भूली बिसरी हो जाएँगी
वो शाम जब भी आयेगी
मुझको देना आवाज़ कोई
या हाथ बढ़ाना तुम अपना
मैं थाम के हाथ फिर से तब
आगे तुम्हे ले जाऊंगा
साथ तुम्हारा निभाऊंगा ।
वो सहर होगी जीवन की
ढलता होगा दिन कोई
शुरुआत करेंगे हम फिर से
फिर देखेंगे हम साथ वही
चाँद को पाने के सपने
जीवन थमता जायेगा
हाँ, जीवन थमता जायेगा
पर, फिर से प्यार हमें हो जायेगा ।

- राही

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