Tuesday, 2 April 2013

|| इनसे आवाज़ आती है अब भी ||

Photo Courtesy : Neha 

कितनी कहानियां कितने किस्से
बसे हैं पुरानी पत्थर की दीवारों में
जो अब बस बंजर सी इमारत हैं
इनसे आवाज़ आती है फिर भी 

तस्वीर बोलती हो जैसे
इतिहास के पन्ने
आहिस्ता आहिस्ता पलट रहे हों 

गवाही दे रही हो जैसे
दिलेरी की मोहब्बतों की
सदियों से अनजान दास्तानों की

कोना कोना रो रहा हो जैसे
'राही' तेरी बर्बादी पर
इनसे ज़्यादा तो तू टूटा है

इनसे आवाज़ आती है अब भी  |

 
कितनी कहानियां कितने किस्से
बसे हैं पुरानी पत्थर की दीवारों में
जो अब बस बंजर सी इमारत हैं
इनसे आवाज़ आती है फिर भी

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