Tuesday, 4 September 2012

प्यार

Courtesy : Neha Dubey
वो  क्या है जो आग को पानी से मिला दे
बुझने ना दे तपिश उसकी, पर प्यास को बुझा दे
महासागर में पिघल रहे सूरज को देखो
जैसे सोने का दीपक कोई बुझने को हो
रात गहराने लगी हो
लहरें शोर मचाने लगीं हों
और नींद सागर को आने लगी हो
तो वो ख़ुद को मिटा रहा है
अस्तित्व अपना छोड़ कर
सोने की चादर सागर को ओढ़ा रहा है
वो तो सागर को सुला रहा है
वो तो ख़ुद को मिटा रहा है
प्यार है उसे. वो प्यार निभा रहा है
पिघल रहा है सूरज, सागर को सजा रहा है
वो तो सागर को सुला रहा है
प्यार है उसे. वो प्यार निभा रहा है |
वो प्यार है, हाँ वो प्यार ही है
जो आग को पानी से मिला दे
बुझने ना दे तपिश उसकी, पर प्यास को बुझा दे ||