Wednesday, 8 August 2012

तमाशा - dedicated to the victims of Assam riots


Violence of any kind- physical, mental, communal , ethnic , regional and so on Only brings pain and more pain. Dedicated to the victims of Assam riots. May Good sense prevail. Hope you like it.

आवारा उड़ता हुआ, एक परिंदा मुझको मिला
हमने की कुछ गुफ्तगू , फ़िर बंजारा वो उड़ चला ||

चुपके से उसने कहा , दुनिया का हाल बुरा
ऐ मौला क्यूँ ये बेरुखी, ये तमाशा क्या है भला ||

चार कच्ची दीवारों का , घर था कुछ लोगों का
खुश थे उसमें सभी, वो पंच्छी  और कहता गया  ||

फ़िर एक दिन ऐसा हुआ, नफरत के शोले जले,
गलियों से धुआं उठा, वो मेरा घर भी जल गया ||

बेघर सब होने लगे, अपनों को खोने लगे
जाने क्यूँ थमता नहीं , नफरत का ये सिलसिला ||

चुपके से उसने कहा , दुनिया का हाल बुरा
ऐ मौला क्यूँ ये बेरुखी, ये तमाशा क्या है भला ||

आवारा उड़ता हुआ, एक परिंदा मुझको मिला
हमने की कुछ गुफ्तगू , फ़िर बंजारा वो उड़ चला ||

क्या मंदिर या मस्जिद कोई, जाने क्या उसका पता
हाथ आये तो बस है बुत, ना आये तो है ख़ुदा ||

बहनों को कर बेआबरू, अपनों का पीके लहू
कोई भी ना था सुकून, वो दीवाना रोने लगा ||

क्या तेरी या मेरी ज़मीं, क्या तेरा या मेरा ख़ुदा
जाऊं तो जाऊं कहाँ, वो जाने को होने लगा ||

आँखों से आंसू बहे, अब दिल ये बस ये कहे
आजा तू अब आ भी जा, तू ही कर कुछ फैसला ||

चुपके से उसने कहा , दुनिया का हाल बुरा
ऐ मौला क्यूँ ये बेरुखी, ये तमाशा क्या है भला ||

आवारा उड़ता हुआ, एक परिंदा मुझको मिला
हमने की कुछ गुफ्तगू , फ़िर बंजारा वो उड़ चला ||

2 comments:

  1. too good .... I simply loved it :)
    very nice ....keep writing ...

    -Isha

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