Sunday, 19 February 2012

तमाशा

ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं
खो के अपनी हकीक़त भटक सा गया मैं ।

मैं निकला था घर से जिस जुसतजू में
वो तो नामुकम्मल ख़ुद खो गया मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

मुझे क्या पता था मुझे क्या खबर थी
हासिल की कोशिशों में लुटता रहा मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

थे तूफ़ान हजारों मेरी ख्वाहिशों में
पर ये मेरा मुक़द्दर साहिल पा गया मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

कुछ शौहरत की खातिर, दौलत की चमक में
अपने ख्वाबों का सौदा करता रहा मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

कहते हैं की सच आइना बोलता है
अपनी ही नज़र में गिरता रहा मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

ये तमाशाई दुनिया तमाशाई 'राही'
देखते देखते ही तमाशा बन गया मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..

इस ज़िन्दगी का मुसाफिर मैं 'राही'
ज़िन्दगी के सफ़र में जीता मरता रहा मैं ।
ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं..


ये दुनिया की बातों में जो आ गया मैं
खो के अपनी हकीक़त भटक सा गया मैं ।



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