Wednesday, 31 August 2011

तुम 'तुम' नहीं होते, मैं 'मैं' नहीं होता

आईने से अगर चेहरे हुआ करते तो क्या होता
तुम 'तुम' नहीं होते, मैं 'मैं' नहीं होता !!

मुकद्दर में बराबर सब अगर होता तो क्या होता
जो न होता कोई बर्बाद, कोई आबाद नहीं होता !!

आने जाने का सिलसिला नहीं होता तो क्या होता
न होती किसी में जान, कोई शमशान नहीं होता !!

आवारा 'राही' काफ़िर नहीं होता तो क्या होता
जो न होता कोई नापाक, कोई पाक नहीं होता !!

फ़रिश्ते सभी से मिला करते तो क्या होता 
न होता कोई शैतान, कोई भगवान् नहीं होता !!

आईने से अगर चेहरे हुआ करते तो क्या होता
तुम 'तुम' नहीं होते, मैं 'मैं' नहीं होता !!

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