Friday, 24 June 2011

दिल | dil

न जानता है तू
न जान पायेगा
तेरे मिजाज़ हैं अलग
तू कैसे मान जायेगा
जो कुछ कहूँगा मैं
तुझे न रास आयेगा
तुझे इल्म है ही क्या 
मेरी मजबूरियां हैं क्या
मैं क्यूँ रुका हुआ
मैं क्यूँ थमा हुआ 
मुझे उड़ने को न कह 
ऐ ग़म-ए-दिल |
कई डोरों से बंधा हुआ 
मैं कैद हूँ यहाँ
मुझे उड़ने को न कह
ऐ ग़म-ए-दिल ||
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na jaanta hai tu
na jaan payega
tere mijaaz hain alag
tu kaise maan payega
jo kuch kahunga main
tujhe na raas ayega
tujhe ilm hai hi kya
meri majbooriyan hain kya
main kyun ruka hua
main kyun thama hua
mujhe udne ko na kah
aye gham-e-dil.
kai doron se bandha hua
main kaid hun yahan
mujhe udhne ko na kah
aye gham-e-dil.