Thursday, 17 March 2011

Kayamat ki Raat. | क़यामत की रात .

Hum to tamannaon ke aanchal mein simat jaate the
Jaane kis mod se nikli, haasil ki baat.

Aaj bhi karti hain mehsoos meri ungliyan
Kabhi pakda tha haathon mein, jo aapka haath.

Main saath chalne ki koshish to kiya karta tha
Tum ruk na paye lekin, Raahi ke saath.

Aaj karta hai insaan jo use karne do
Jab Woh bolega hogi Kayamat ki raat.


Hum to tamannaon ke aanchal mein simat jaate the
Jaane kis mod se nikli, haasil ki baat.

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हम  तो  तमन्नाओं  के  आँचल  में  सिमट  जाते  थे 
जाने  किस  मोड़  से  निकली, हासिल  की  बात . 

आज  भी  करती  हैं  महसूस  मेरी  उँगलियाँ 
कभी  पकड़ा  था  हाथों  में, जो  आपका  हाथ .

मैं  साथ  चलने  की  कोशिश  तो  किया  करता  था 
तुम  रुक  न  पाए  लेकिन , राही  के  साथ . 

आज  करता  है  इंसान  जो  उसे  करने  दो 
जब  वोह  बोलेगा  होगी  क़यामत  की  रात .

हम  तो  तमन्नाओं  के  आँचल  में  सिमट  जाते  थे 
जाने  किस  मोड़  से  निकली, हासिल  की  बात . 



3 comments:

  1. :-) Interesting!
    Jab Woh bolega hogi Kayamat ki raat!!
    wah wahh...
    kya baat kahi..

    Neha

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  2. great lines.....:)

    really heart touching....

    मैं साथ चलने की कोशिश तो किया करता था
    तुम रुक न पाए लेकिन , राही के साथ .....

    great lines.

    Nit's....


    आज करता है इंसान जो उसे करने दो
    जब वोह बोलेगा होगी क़यामत की रात .

    this one's the best.....
    very good work..

    all the best for ur future......

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  3. great work.each line having gr8 meaning.

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